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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश
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श्लोक 18
श्लोक
12.295.18
ये चादौ ब्राह्मणा: सृष्टा ब्रह्मणा तपसा पुरा।
ते भावयन्त: पृथिवीं विचरन्ति दिवं तथा॥ १८॥
अनुवाद
पूर्वकाल में ब्रह्माजी द्वारा उत्पन्न मरीचि आदि ब्राह्मण अपनी तपस्या के प्रभाव से पृथ्वी और आकाश को पवित्र करते हुए विचरण करते हैं ॥18॥
The Brahmins like Marichi etc. created by Brahma in the past, roam around purifying the earth and sky by the effect of their austerity. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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