श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.295.15 
प्रजापति: प्रजा: पूर्वमसृजत् तपसा विभु:।
क्वचित् क्वचिद् ब्रह्मपरो व्रतान्यास्थाय पार्थिव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! प्राचीन काल में महाबली प्रजापति कभी तपस्या में तल्लीन होकर, कभी ब्रह्माजी के व्रत में तल्लीन होकर जगत् की रचना करते थे॥15॥
 
O king! In ancient times, the powerful Prajapati created the world while being immersed in austerity and sometimes being immersed in a vow devoted to Brahma. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)