Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.294.7: संसार में प्रसिद्ध हो चुका मनुष्य यदि मन में अभिमान या लोभ के कारण पाप करने लगे, तो उसके कर्म अनुकरण योग्य नहीं हैं ॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संसिद्ध: पुरुषो लोके यदाचरति पापकम्।
मदेनाभिप्लुतमनास्तच्च न ग्राह्यमुच्यते॥ ७॥
अनुवाद
संसार में प्रसिद्ध हो चुका मनुष्य यदि मन में अभिमान या लोभ के कारण पाप करने लगे, तो उसके कर्म अनुकरण योग्य नहीं हैं ॥7॥
If a man who has become famous in the world starts committing sins due to pride or greed in his mind, then his actions are not worthy of imitation. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥