Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.294.5-6: स्त्री वेश धारण करके रंगमंच पर नृत्य करना या नाटक करना, स्वांग रचना, मदिरा और मांस बेचकर जीविका चलाना, लोहा और चमड़ा बेचना - ये सब काम संसार में निंदित माने गए हैं। जिसके घर में प्राचीन काल से ये काम नहीं होते रहे हों, उसे स्वयं इन्हें आरम्भ नहीं करना चाहिए। जिसके घर में प्राचीन काल से इन कामों को करने की परंपरा रही हो, यदि वह भी इन कामों को त्याग दे, तो यह महान धर्म है - ऐसा शास्त्रों का निर्णय है। | mahabharat अध्याय 12.294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रङ्गावतरणं चैव तथा रूपोपजीवनम्।
मद्यमांसोपजीव्यं च विक्रयं लोहचर्मणो:॥ ५॥
अपूर्विणा न कर्तव्यं कर्म लोके विगर्हितम्।
कृतपूर्वं तु त्यजतो महान् धर्म इति श्रुति:॥ ६॥
अनुवाद
स्त्री वेश धारण करके रंगमंच पर नृत्य करना या नाटक करना, स्वांग रचना, मदिरा और मांस बेचकर जीविका चलाना, लोहा और चमड़ा बेचना - ये सब काम संसार में निंदित माने गए हैं। जिसके घर में प्राचीन काल से ये काम नहीं होते रहे हों, उसे स्वयं इन्हें आरम्भ नहीं करना चाहिए। जिसके घर में प्राचीन काल से इन कामों को करने की परंपरा रही हो, यदि वह भी इन कामों को त्याग दे, तो यह महान धर्म है - ऐसा शास्त्रों का निर्णय है।
Dancing or performing plays on the stage in the guise of a woman, acting as a mime, earning a livelihood by selling wine and meat, and selling iron and leather - all these works are considered condemned by the world. One in whose house these works have not been done since ancient times should not start them himself. If one who has a tradition of doing these works since ancient times, he too gives up these works, then it is a great Dharma - this is the verdict of the scriptures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥