Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.294.4: जब शूद्र सेवा से जीविका नहीं चला सकता, तब उसे व्यापार, पशुपालन, शिल्प आदि से भी जीविका चलाने की अनुमति है। 4॥   |   mahabharat अध्याय 12.294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.294.4 
वाणिज्यं पाशुपाल्यं च तथा शिल्पोपजीवनम्।
शूद्रस्यापि विधीयन्ते यदा वृत्तिर्न जायते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब शूद्र सेवा से जीविका नहीं चला सकता, तब उसे व्यापार, पशुपालन, शिल्प आदि से भी जीविका चलाने की अनुमति है। 4॥
 
When a Shudra cannot earn his living through service, then he is also allowed to earn his living through business, animal husbandry, crafts etc. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)