Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.294.26: नरेश्वर! इसी प्रकार तुम भी जितेन्द्रिय क्षत्रिय होकर अपने स्वजनों पर प्रेम रखते हुए अपने धर्मानुसार प्रजा, सेवक और पुत्रों का पालन करो॥26॥ | mahabharat अध्याय 12.294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स त्वमेवंविधो दान्त: क्षत्रिय: प्रियबान्धव:।
प्रजा भृत्यांश्च पुत्रांश्च स्वधर्मेणानुपालय॥ २६॥
अनुवाद
नरेश्वर! इसी प्रकार तुम भी जितेन्द्रिय क्षत्रिय होकर अपने स्वजनों पर प्रेम रखते हुए अपने धर्मानुसार प्रजा, सेवक और पुत्रों का पालन करो॥26॥
Nareshwar! In the same way, you too, being a Jitendriya Kshatriya, having love for your relatives, follow your subjects, servants and sons according to your dharma. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥