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mahabharat 12.294.20: सप्तर्षियों के बाद विपृथु नामक राजा पृथ्वी का शासक बना और कई अन्य क्षत्रिय भी विभिन्न क्षेत्रों के राजा बने।   |   mahabharat अध्याय 12.294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.294.20 
सप्तर्षीणामथोर्ध्वं च विपृथुर्नाम पार्थिव:।
राजान: क्षत्रियाश्चैव मण्डलेषु पृथक् पृथक्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सप्तर्षियों के बाद विपृथु नामक राजा पृथ्वी का शासक बना और कई अन्य क्षत्रिय भी विभिन्न क्षेत्रों के राजा बने।
 
After the Saptarishis, a king named Viprithu became the ruler of the Earth and many other Kshatriyas also became kings of different regions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)