Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.294.2-3: शूद्र तीनों वर्णों का नित्य सेवक कहा गया है। यदि ब्राह्मण जीविका के अभाव में क्षत्रिय या वैश्य का धर्म अपनाता है, तो वह अपवित्र नहीं होता; किन्तु जब वह शूद्र का धर्म अपना लेता है, तो तुरन्त पापी हो जाता है। 2-3॥ | mahabharat अध्याय 12.294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शूद्र तीनों वर्णों का नित्य सेवक कहा गया है। यदि ब्राह्मण जीविका के अभाव में क्षत्रिय या वैश्य का धर्म अपनाता है, तो वह अपवित्र नहीं होता; किन्तु जब वह शूद्र का धर्म अपना लेता है, तो तुरन्त पापी हो जाता है। 2-3॥
Shudra is said to be a daily servant of all three varnas. If a Brahmin, due to lack of livelihood, follows the religion of a Kshatriya or a Vaishya, then he does not become impure; But when he adopts the religion of Shudra, he immediately becomes sinful. 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥