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mahabharat 12.294.17: उन दैत्यों का स्वामी भयंकर आकार वाला और अत्यन्त बलवान था। वह देवताओं को सदैव भयभीत करता रहता था; किन्तु भगवान शूलपाणि ने उसे भी मार डाला॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.294.17 
तेषामधिपतिस्त्वासीद् भीमो भीमपराक्रम:।
देवतानां भयकर: स हत: शूलपाणिना॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उन दैत्यों का स्वामी भयंकर आकार वाला और अत्यन्त बलवान था। वह देवताओं को सदैव भयभीत करता रहता था; किन्तु भगवान शूलपाणि ने उसे भी मार डाला॥17॥
 
The lord of those demons was of terrible size and extremely powerful. He always frightened the gods; But Lord Shulpani killed him also. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)