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mahabharat 12.294.11: तब लोगों में धर्म का नाश करने वाला अभिमान प्रकट हुआ। फिर जब लोगों के मन में अभिमान आया, तो क्रोध भी प्रकट हुआ ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 294: पराशरगीता—ब्राह्मण और शूद्रकी जीविका, निन्दनीय कर्मोंके त्यागकी आज्ञा, मनुष्योंमें आसुरभावकी उत्पत्ति और भगवान् शिवके द्वारा उसका निवारण तथा स्वधर्मके अनुसार कर्तव्यपालनका आदेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.294.11 
तासां दर्प: समभवत् प्रजानां धर्मनाशन:।
दर्पात्मनां तत: पश्चात् क्रोधस्तासामजायत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तब लोगों में धर्म का नाश करने वाला अभिमान प्रकट हुआ। फिर जब लोगों के मन में अभिमान आया, तो क्रोध भी प्रकट हुआ ॥11॥
 
Then pride, which destroyed Dharma, appeared among the people. Then when pride came into the minds of the people, anger also appeared. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)