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mahabharat 12.293.7: जो विद्वान् पुरुष सुख और दुःख में सदैव शुभ कर्म करता है, वह यहाँ शास्त्रों को देखता और समझता है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.293: पराशरगीता—शूद्रके लिये सेवावृत्तिकी प्रधानता, सत्संगकी महिमा और चारों वर्णोंके धर्मपालनका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 293: पराशरगीता—शूद्रके लिये सेवावृत्तिकी प्रधानता, सत्संगकी महिमा और चारों वर्णोंके धर्मपालनका महत्त्व  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.293.7 
सुखे वा यदि वा दु:खे वर्तमानो विचक्षण:।
यश्चिनोति शुभान्येव स तन्त्राणीह पश्यति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो विद्वान् पुरुष सुख और दुःख में सदैव शुभ कर्म करता है, वह यहाँ शास्त्रों को देखता और समझता है ॥7॥
 
The learned person who always performs auspicious deeds whether in happiness or sorrow, sees and understands the scriptures here. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)