Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.293.14-15: जो राजा धर्मपूर्वक अपनी प्रजा की रक्षा करता है, वह अपने धर्मपूर्वक आचरण के कारण संसार में आदरणीय होता है। इसी प्रकार जो ब्राह्मण धर्मपूर्वक स्वाध्याय करता है, जो वैश्य अपने धर्मानुसार धन कमाने में सदैव तत्पर रहता है, तथा जो शूद्र संयमपूर्वक द्विजों की सेवा करता है, वे सभी अपने धर्मपूर्वक आचरण के कारण संसार में आदरणीय होते हैं। हे नरेन्द्र! इसके विपरीत आचरण करने से सभी लोग अपने धर्म से च्युत हो जाते हैं। | mahabharat अध्याय 12.293: पराशरगीता—शूद्रके लिये सेवावृत्तिकी प्रधानता, सत्संगकी महिमा और चारों वर्णोंके धर्मपालनका महत्त्व । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माद् यो रक्षति नृप: स धर्मेणेति पूज्यते।
अधीते चापि यो विप्रो वैश्यो यश्चार्जने रत:॥ १४॥
यश्च शुश्रूषते शूद्र: सततं नियतेन्द्रिय:।
अतोऽन्यथा मनुष्येन्द्र स्वधर्मात् परिहीयते॥ १५॥
अनुवाद
जो राजा धर्मपूर्वक अपनी प्रजा की रक्षा करता है, वह अपने धर्मपूर्वक आचरण के कारण संसार में आदरणीय होता है। इसी प्रकार जो ब्राह्मण धर्मपूर्वक स्वाध्याय करता है, जो वैश्य अपने धर्मानुसार धन कमाने में सदैव तत्पर रहता है, तथा जो शूद्र संयमपूर्वक द्विजों की सेवा करता है, वे सभी अपने धर्मपूर्वक आचरण के कारण संसार में आदरणीय होते हैं। हे नरेन्द्र! इसके विपरीत आचरण करने से सभी लोग अपने धर्म से च्युत हो जाते हैं।
The king who protects his subjects in a righteous manner is respected in the world because of his religious conduct. Similarly, the Brahmin who studies himself in a righteous manner, the Vaishya who is always ready to earn money according to his religion and the Shudra who always serves the Dwija castes with self-control, all of them are respected in the world because of their religious conduct. O Narendra! By behaving contrary to this, everyone falls from their religion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥