Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.292.15-17: असित, देवल, नारद, पर्वत, कक्षीवन, जमदग्निनन्दन परशुराम, मन को नियंत्रित करने वाले तण्ड, वशिष्ठ, जमदग्नि, विश्वामित्र, अत्रि, भारद्वाज, हरिश्मश्रु, कुन्धधर और श्रुतश्रवा - इन महान ऋषियों ने वेदों के छंदों के माध्यम से भगवान विष्णु की स्तुति पर ध्यान केंद्रित किया और बुद्धिमान श्री हरि की कृपा से तपस्या की। सफलता हासिल की है. 15-17 | mahabharat अध्याय 12.292: पराशरगीता—धर्मोपार्जित धनकी श्रेष्ठता, अतिथि-सत्कारका महत्त्व, पाँच प्रकारके ऋणोंसे छूटनेकी विधि, भगवत्स्तवनकी महिमा एवं सदाचार तथा गुरुजनोंकी सेवासे महान् लाभ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असित, देवल, नारद, पर्वत, कक्षीवन, जमदग्निनन्दन परशुराम, मन को नियंत्रित करने वाले तण्ड, वशिष्ठ, जमदग्नि, विश्वामित्र, अत्रि, भारद्वाज, हरिश्मश्रु, कुन्धधर और श्रुतश्रवा - इन महान ऋषियों ने वेदों के छंदों के माध्यम से भगवान विष्णु की स्तुति पर ध्यान केंद्रित किया और बुद्धिमान श्री हरि की कृपा से तपस्या की। सफलता हासिल की है. 15-17
Asit, Deval, Narada, Parvat, Kakshivan, Jamdagninandan Parashuram, Tanda who controls the mind, Vashishtha, Jamdagni, Vishwamitra, Atri, Bharadwaja, Harishmashru, Kundhadhar and Shrutasrava - these great sages concentrated on praising Lord Vishnu through the verses of the Vedas and performed penance by the grace of the wise Sri Hari. Have achieved success. 15-17
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥