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mahabharat 12.292.14: देवाधिदेव महादेवजी को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करके महर्षि उशना इसी नाम से प्रसिद्ध हुए। उसी समय देवी पार्वती की स्तुति करके वे प्रसिद्ध ऋषि आकाश में ग्रह रूप में स्थित होकर आनन्दपूर्वक आनन्दित हो रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.292: पराशरगीता—धर्मोपार्जित धनकी श्रेष्ठता, अतिथि-सत्कारका महत्त्व, पाँच प्रकारके ऋणोंसे छूटनेकी विधि, भगवत्स्तवनकी महिमा एवं सदाचार तथा गुरुजनोंकी सेवासे महान् लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 292: पराशरगीता—धर्मोपार्जित धनकी श्रेष्ठता, अतिथि-सत्कारका महत्त्व, पाँच प्रकारके ऋणोंसे छूटनेकी विधि, भगवत्स्तवनकी महिमा एवं सदाचार तथा गुरुजनोंकी सेवासे महान् लाभ  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.292.14 
गत: शुक्रत्वमुशना देवदेवप्रसादनात्।
देवीं स्तुत्वा तु गगने मोदते यशसा वृत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
देवाधिदेव महादेवजी को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करके महर्षि उशना इसी नाम से प्रसिद्ध हुए। उसी समय देवी पार्वती की स्तुति करके वे प्रसिद्ध ऋषि आकाश में ग्रह रूप में स्थित होकर आनन्दपूर्वक आनन्दित हो रहे हैं।
 
Maharishi Ushana became famous by the same name after pleasing Devadhidev Mahadevji and receiving his blessings. At the same time, by praising Goddess Parvati, that famous sage is enjoying being situated in the form of a planet in the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)