Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.291.20-21: राजन! यदि उसी जल से भरे हुए घड़े में दूसरा जल डाला जाए, तो घड़े में पहले से रखा हुआ जल और नया डाला हुआ जल, दोनों बढ़ जाते हैं और इस प्रकार घड़ा और अधिक जल से भर जाता है। इसी प्रकार यहाँ जो विवेकपूर्वक नए पुण्य कर्म किए जाते हैं, संचित पुण्यों के समान, वे दोनों मिलकर परम पुण्य कर्म बन जाते हैं (और उनके द्वारा वह मनुष्य महान पुण्यात्मा बन जाता है)।॥ 20-21॥ | mahabharat अध्याय 12.291: पराशरगीता—कर्मफलकी अनिवार्यता तथा पुण्यकर्मसे लाभ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! यदि उसी जल से भरे हुए घड़े में दूसरा जल डाला जाए, तो घड़े में पहले से रखा हुआ जल और नया डाला हुआ जल, दोनों बढ़ जाते हैं और इस प्रकार घड़ा और अधिक जल से भर जाता है। इसी प्रकार यहाँ जो विवेकपूर्वक नए पुण्य कर्म किए जाते हैं, संचित पुण्यों के समान, वे दोनों मिलकर परम पुण्य कर्म बन जाते हैं (और उनके द्वारा वह मनुष्य महान पुण्यात्मा बन जाता है)।॥ 20-21॥
King! If another water is poured into the same pot filled with water, then the water already kept in the pot and the newly added water, both increase and thus the pot becomes full of more water. In the same way, the new virtuous deeds that are done here with discretion, similar to the ones that are accumulated, both of them together become the most virtuous deeds (and through them that man becomes a great virtuous soul).॥ 20-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥