Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.291.18: राजा! जो मनुष्य गहन विचार करके तथा यह निश्चय करके कि मैं अमुक कार्य कर सकूँगा या नहीं, कोई अच्छा कार्य करता है, वह निश्चय ही अपना कल्याण देखता है॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.291: पराशरगीता—कर्मफलकी अनिवार्यता तथा पुण्यकर्मसे लाभ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा! जो मनुष्य गहन विचार करके तथा यह निश्चय करके कि मैं अमुक कार्य कर सकूँगा या नहीं, कोई अच्छा कार्य करता है, वह निश्चय ही अपना कल्याण देखता है॥18॥
King! A person who performs a good deed after thinking deeply and deciding whether he will be able to do a particular task or not, will certainly see good for himself.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥