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mahabharat 12.291.10: नरेन्द्र! बिना रंगा हुआ कपड़ा धोने से स्वच्छ हो जाता है; परन्तु काले रंग से रंगा हुआ कपड़ा बहुत प्रयत्न करने पर भी श्वेत नहीं होता। पाप को भी ऐसा ही समझो। उसका रंग भी आसानी से नहीं उड़ता॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.291: पराशरगीता—कर्मफलकी अनिवार्यता तथा पुण्यकर्मसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 291: पराशरगीता—कर्मफलकी अनिवार्यता तथा पुण्यकर्मसे लाभ  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.291.10 
विरक्तं शोध्यते वस्त्रं न तु कृष्णोपसंहितम्।
प्रयत्नेन मनुष्येन्द्र पापमेवं निबोध मे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! बिना रंगा हुआ कपड़ा धोने से स्वच्छ हो जाता है; परन्तु काले रंग से रंगा हुआ कपड़ा बहुत प्रयत्न करने पर भी श्वेत नहीं होता। पाप को भी ऐसा ही समझो। उसका रंग भी आसानी से नहीं उड़ता॥ 10॥
 
Narendra! An undyed cloth becomes clean after washing; but a cloth dyed in black colour does not become white even after trying hard. Consider sin to be the same. Its colour also does not fade easily.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)