Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.290.7: श्रेष्ठ! जो मनुष्य धर्म को जानता है और उसका आश्रय लेता है, वह स्वर्ग में सम्मानित होता है। वेदों में 'सत्यं वद्, धर्मं चर, यजेत्, जुहुयात्' आदि वाक्यों द्वारा मनुष्यों के जो कर्तव्य बताए गए हैं, वे धर्म के लक्षण हैं। 7॥ | mahabharat अध्याय 12.290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रेष्ठ! जो मनुष्य धर्म को जानता है और उसका आश्रय लेता है, वह स्वर्ग में सम्मानित होता है। वेदों में 'सत्यं वद्, धर्मं चर, यजेत्, जुहुयात्' आदि वाक्यों द्वारा मनुष्यों के जो कर्तव्य बताए गए हैं, वे धर्म के लक्षण हैं। 7॥
The best! A person who knows religion and takes refuge in it is honored in heaven. The duties of human beings prescribed in the Vedas through sentences like 'Satyam Vad, Dharmam Char, Yajet, Juhuyat' etc., are the characteristics of Dharma. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥