श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.290.6 
पराशर उवाच
धर्म एव कृत: श्रेयानिह लोके परत्र च।
तस्माद्धि परमं नास्ति यथा प्राहुर्मनीषिण:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
पराशर जी बोले- राजन! जैसा कि विद्वान पुरुष कहते हैं, यदि धर्म का आचरण विधिपूर्वक किया जाए, तो वह इस लोक में भी लाभदायक होता है और परलोक में भी। उससे बढ़कर कल्याण का कोई साधन नहीं है।
 
Parashar ji said- King! As the wise men say, if Dharma is performed according to the prescribed method, then it is beneficial in this world as well as the other world. There is no better means of attaining welfare than that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)