Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.290.25-26: राजन! कायर क्षत्रिय, सब कुछ खाने वाला ब्राह्मण (खाने या खाने का विचार भी न करने वाला), धनोपार्जन का प्रयत्न न करने वाला वैश्य अथवा आलसी शूद्र, सद्गुणों से रहित विद्वान, सदाचार का पालन न करने वाला कुलीन पुरुष, सत्य से भ्रष्ट धार्मिक पुरुष, दुष्टाचारिणी स्त्री, विषय-भोगों में आसक्त योगी, केवल अपने लिए भोजन पकाने वाला पुरुष, मूर्ख वक्ता, राजा से रहित राष्ट्र और प्रजा के प्रति उदासीन राजा - ये सब शोक करने योग्य हैं अर्थात निन्दनीय हैं॥25-26॥ | mahabharat अध्याय 12.290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! कायर क्षत्रिय, सब कुछ खाने वाला ब्राह्मण (खाने या खाने का विचार भी न करने वाला), धनोपार्जन का प्रयत्न न करने वाला वैश्य अथवा आलसी शूद्र, सद्गुणों से रहित विद्वान, सदाचार का पालन न करने वाला कुलीन पुरुष, सत्य से भ्रष्ट धार्मिक पुरुष, दुष्टाचारिणी स्त्री, विषय-भोगों में आसक्त योगी, केवल अपने लिए भोजन पकाने वाला पुरुष, मूर्ख वक्ता, राजा से रहित राष्ट्र और प्रजा के प्रति उदासीन राजा - ये सब शोक करने योग्य हैं अर्थात निन्दनीय हैं॥25-26॥
Rajan! A cowardly Kshatriya, a Brahmin who eats everything (without even thinking about whether to eat or eat), a Vaishya without any effort to earn money or an indolent Shudra, a scholar without good qualities, a noble man who does not follow good conduct, a religious man who is corrupted by truth, a woman who is wicked, a yogi who is obsessed with sensual pleasures, a man who cooks food only for himself, a foolish speaker, a nation without a king, and a person who is indifferent towards the people. A king who does not have affection - all of them are worthy of mourning, that is, they are condemnable. 25-26॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पराशरगीतायां नवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पराशरगीताविषयक दो सौ नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥