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mahabharat 12.290.2: हे महापुरुष! इसलिए मैं आपसे पूछता हूँ कि मनुष्य को कौन-से शुभ कर्म करने चाहिए जिससे वह इस लोक में तथा परलोक में परम कल्याण को प्राप्त हो? कृपा करके मुझे यह बताइए।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.290.2 
किं कर्म पुरुष: कृत्वा शुभं पुरुषसत्तम।
श्रेय: परमवाप्नोति प्रेत्य चेह च तद् वद॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे महापुरुष! इसलिए मैं आपसे पूछता हूँ कि मनुष्य को कौन-से शुभ कर्म करने चाहिए जिससे वह इस लोक में तथा परलोक में परम कल्याण को प्राप्त हो? कृपा करके मुझे यह बताइए।॥2॥
 
O great man! That is why I ask you, what good deeds should a man do so that he can attain the ultimate welfare in this world as well as the next? Kindly tell me this. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)