Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.290.17: हे राजन! मनुष्य को अपने कर्मों के फलस्वरूप कभी केवल सुख ही मिलता है और कभी सुख-दुःख दोनों एक साथ। चाहे पुण्य कर्म हो या पाप, उसका फल भोगे बिना उसका नाश नहीं होता॥ 17॥ | mahabharat अध्याय 12.290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निरन्तरं च मिश्रं च लभते कर्म पार्थिव।
कल्याणं यदि वा पापं न तु नाशोऽस्य विद्यते॥ १७॥
अनुवाद
हे राजन! मनुष्य को अपने कर्मों के फलस्वरूप कभी केवल सुख ही मिलता है और कभी सुख-दुःख दोनों एक साथ। चाहे पुण्य कर्म हो या पाप, उसका फल भोगे बिना उसका नाश नहीं होता॥ 17॥
O King! As a result of his deeds, sometimes man gets only happiness and sometimes both happiness and sorrow together. Be it a virtuous or sinful deed, it cannot be destroyed without experiencing its consequences.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥