Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.29.93: सृंजय! राजा मान्धाता चारों गुणों में तुमसे श्रेष्ठ थे और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। जब वे भी मर गए, तो तुम्हारे पुत्र की क्या स्थिति है? इसलिए तुम उनके लिए शोक मत करो।' | mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चेन्ममार सृंजय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथा:॥ ९३॥
अनुवाद
सृंजय! राजा मान्धाता चारों गुणों में तुमसे श्रेष्ठ थे और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। जब वे भी मर गए, तो तुम्हारे पुत्र की क्या स्थिति है? इसलिए तुम उनके लिए शोक मत करो।'
‘Srunjay! King Mandhaata was superior to you in all the four auspicious qualities and was even more pious than your son. When even he died, what is the status of your son? Therefore, do not grieve for him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥