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mahabharat 12.29.9: राजन! जैसे स्वप्न में प्राप्त धन जागने पर मिथ्या हो जाता है, उसी प्रकार महायुद्ध में नष्ट हुए उन क्षत्रियों को अब देखना कठिन है।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.29.9 
स्वप्नलब्धा यथा लाभा वितथा: प्रतिबोधने।
एवं ते क्षत्रिया राजन् ये व्यतीता महारणे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
राजन! जैसे स्वप्न में प्राप्त धन जागने पर मिथ्या हो जाता है, उसी प्रकार महायुद्ध में नष्ट हुए उन क्षत्रियों को अब देखना कठिन है।
 
King! Just as the wealth obtained in dreams becomes false upon waking up, similarly, it is now difficult to see those Kshatriyas who were destroyed in the great war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)