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mahabharat 12.29.87: राजा मान्धाता बड़े ही धर्मात्मा और महापुरुष थे। उन्होंने युद्ध में इंद्र के समान पराक्रम दिखाया। यह सारी पृथ्वी एक ही दिन में उनके अधीन हो गई।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.87 
तमिमं पृथिवी सर्वा एकाह्ना समपद्यत।
धर्मात्मानं महात्मानं शूरमिन्द्रसमं युधि॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
राजा मान्धाता बड़े ही धर्मात्मा और महापुरुष थे। उन्होंने युद्ध में इंद्र के समान पराक्रम दिखाया। यह सारी पृथ्वी एक ही दिन में उनके अधीन हो गई।
 
‘King Mandhaata was a very pious and great-minded person. He displayed bravery like Indra in the war. This entire earth came under his control in a single day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)