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mahabharat 12.29.85: तत्पश्चात् उस महाहृदयी बालक युवनाश्वकुमार का पोषण करने के लिए इन्द्र के हाथ से उसके मुख में दूध की धारा प्रवाहित होने लगी।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  12.29.85 
ततस्तु पयसो धारां पुष्टिहेतोर्महात्मन:।
तस्यास्ये यौवनाश्वस्य पाणिरिन्द्रस्य चास्रवत्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस महाहृदयी बालक युवनाश्वकुमार का पोषण करने के लिए इन्द्र के हाथ से उसके मुख में दूध की धारा प्रवाहित होने लगी।
 
‘Thereafter, to nourish the great-hearted boy, Yuvanashvakumar, a stream of milk began to flow from Indra's hand into his mouth. 85.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)