Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.29.75-76: उसके स्वर्णमयी यूप में, जिस पर स्वर्णमयी घेरा बना हुआ था, छः हजार देवगन्धर्व नृत्य करते थे। वहाँ विश्वावसु स्वयं बीच में बैठकर सात स्वरों में वीणा बजाते थे। उस समय सभी प्राणी यही सोचते थे कि ये लोग मेरे सामने ही वीणा बजा रहे हैं।' 75-76 | mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके स्वर्णमयी यूप में, जिस पर स्वर्णमयी घेरा बना हुआ था, छः हजार देवगन्धर्व नृत्य करते थे। वहाँ विश्वावसु स्वयं बीच में बैठकर सात स्वरों में वीणा बजाते थे। उस समय सभी प्राणी यही सोचते थे कि ये लोग मेरे सामने ही वीणा बजा रहे हैं।' 75-76
‘In his golden yupa, on which the golden enclosure was made, six thousand Devgandharvas used to dance. There Vishwavasu himself used to sit in the middle and play the Veena in seven notes. At that time all the beings used to think that these people are playing the instrument in front of me. 75-76.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥