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mahabharat 12.29.74: उनके यज्ञ की शोभा सोने से निर्मित और चमकती हुई एक विशाल यूप (वेदी) थी। यज्ञ करते समय इंद्र आदि देवता सदैव उस यूप के नीचे रहते थे। 74.   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.74 
यस्य यज्ञे महानासीद् यूप: श्रीमान् हिरण्मय:।
तं देवा: कर्म कुर्वाणा: शक्रज्येष्ठा उपाश्रयन्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
उनके यज्ञ की शोभा सोने से निर्मित और चमकती हुई एक विशाल यूप (वेदी) थी। यज्ञ करते समय इंद्र आदि देवता सदैव उस यूप के नीचे रहते थे। 74.
 
‘A huge yup (ceremonial altar) made of gold and shining with luster was a great adornment of their yajna. While performing the yajna rituals, gods like Indra etc. always stayed under that yup. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)