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mahabharat 12.29.73: दिलीपजी के प्रत्येक यज्ञ में पुरोहित दक्षिणा में एक हजार स्वर्ण निर्मित हाथी प्राप्त करता था और उन्हें अपने घर ले जाता था॥ 73॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.73 
यस्येह यजमानस्य यज्ञे यज्ञे पुरोहित:।
सहस्रं वारणान् हैमान् दक्षिणामत्यकालयत्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
दिलीपजी के प्रत्येक यज्ञ में पुरोहित दक्षिणा में एक हजार स्वर्ण निर्मित हाथी प्राप्त करता था और उन्हें अपने घर ले जाता था॥ 73॥
 
‘In every yajna performed by Dilipa, the priest would receive as dakshina a thousand elephants made of gold and take them to his home.॥ 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)