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mahabharat 12.29.72: राजा ने एकाग्रचित्त होकर अपने उस महान यज्ञ में रत्नों और धन से परिपूर्ण सम्पूर्ण पृथ्वी को ब्राह्मणों को दान कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  12.29.72 
य इमां वसुसम्पूर्णां वसुधां वसुधाधिप:।
ददौ तस्मिन् महायज्ञे ब्राह्मणेभ्य: समाहित:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
राजा ने एकाग्रचित्त होकर अपने उस महान यज्ञ में रत्नों और धन से परिपूर्ण सम्पूर्ण पृथ्वी को ब्राह्मणों को दान कर दिया था।
 
'The king, with his mind concentrated, had donated the entire earth, full of gems and wealth, to the Brahmins in that great yagya of his.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)