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mahabharat 12.29.70: संजय! वह ऊपर वर्णित चारों पहलुओं में तुमसे कहीं श्रेष्ठ था और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा था। जब वह भी मृत्यु से नहीं बच सका, तो दूसरों की तो बात ही क्या? इसलिए तुम अपने पुत्र के लिए शोक मत करो।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.70 
स चेन्ममार सृंजय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथा:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
संजय! वह ऊपर वर्णित चारों पहलुओं में तुमसे कहीं श्रेष्ठ था और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा था। जब वह भी मृत्यु से नहीं बच सका, तो दूसरों की तो बात ही क्या? इसलिए तुम अपने पुत्र के लिए शोक मत करो।
 
Sanjaya! He was far superior to you in all the four aspects mentioned above and was more pious than your son. When even he could not escape death, what can be said about others? Therefore, do not grieve for your son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)