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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.29.7 
शुशुभे वदनं तस्य सुदंष्ट्रं चारुलोचनम्।
व्याकोशमिव विस्पष्टं पद्मं सूर्य इवोदिते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस समय सुन्दर दांतों और आकर्षक नेत्रों वाला उनका मुख सूर्योदय के समय पूर्णतः खिले हुए कमल के समान प्रतीत हो रहा था।
 
At that time his face with beautiful teeth and charming eyes looked like a fully bloomed lotus at sunrise.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)