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mahabharat 12.29.69: ‘त्रिपथगामिनी गंगा ने पुत्री का पद पाकर प्रचुर दक्षिणा देने वाले इक्ष्वाकुवंशी यजमान भगीरथ को अपना पिता माना ॥69॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.69 
भूरिदक्षिणमिक्ष्वाकुं यजमानं भगीरथम्।
त्रिलोकपथगा गङ्गा दुहितृत्वमुपेयुषी॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
‘त्रिपथगामिनी गंगा ने पुत्री का पद पाकर प्रचुर दक्षिणा देने वाले इक्ष्वाकुवंशी यजमान भगीरथ को अपना पिता माना ॥69॥
 
‘Tripathgamini Ganga, after attaining the status of a daughter, considered the Ikshvaku dynasty host Bhagiratha, who gave ample dakshina, as her father. 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)