श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.29.66 
सर्वा रथगता: कन्या रथा: सर्वे चतुर्युज:।
शतं शतं रथे नागा: पद्मिनो हेममालिन:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
वे सभी कन्याएँ अलग-अलग रथों पर बैठी थीं। प्रत्येक रथ में चार घोड़े जुते हुए थे। प्रत्येक रथ के पीछे स्वर्ण मालाओं से सुसज्जित और सिरों पर कमल के चिह्नों से सुसज्जित सौ हाथी थे।
 
‘All those girls were seated in separate chariots. Each chariot had four horses harnessed to it. Behind each chariot were a hundred elephants adorned with golden garlands and decorated with lotus symbols on their heads.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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