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mahabharat 12.29.65: जिन्होंने यज्ञ करते समय अपने विशाल यज्ञ में स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित दस लाख कन्याओं को दक्षिणा स्वरूप दान किया था।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  12.29.65 
य: सहस्रं सहस्राणां कन्या हेमविभूषिता:।
ईजानो वितते यज्ञे दक्षिणामत्यकालयत्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
जिन्होंने यज्ञ करते समय अपने विशाल यज्ञ में स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित दस लाख कन्याओं को दक्षिणा स्वरूप दान किया था।
 
'Who, while performing the yajna, had donated ten lakh girls adorned with golden ornaments as dakshina in his huge yajna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)