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mahabharat 12.29.62: सृंजय! वे चारों शुभ गुणों में तुमसे श्रेष्ठ थे और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। जब वे भी यहाँ नहीं रह सके, तो अन्य लोग क्या करेंगे? अतः तुम्हें अपने पुत्र के लिए शोक नहीं करना चाहिए॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.62 
स चेन्ममार सृंजय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथा:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
सृंजय! वे चारों शुभ गुणों में तुमसे श्रेष्ठ थे और तुम्हारे पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा थे। जब वे भी यहाँ नहीं रह सके, तो अन्य लोग क्या करेंगे? अतः तुम्हें अपने पुत्र के लिए शोक नहीं करना चाहिए॥ 62॥
 
'Srunjay! All four of them were superior to you in auspicious qualities and were even more pious than your son. When even they could not stay here, then what about others? Therefore, you should not grieve for your son.॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)