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mahabharat 12.29.60: श्री रामचंद्रजी युवा और श्याम वर्ण के थे। उनकी आँखें हल्की लाल थीं। वे हाथियों के सरदार के समान शक्तिशाली थे। उनकी विशाल भुजाएँ घुटनों तक फैली हुई थीं। उनका मुख सुंदर था और उनके कंधे सिंह के समान थे।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.60 
युवा श्यामो लोहिताक्षो मातङ्ग इव यूथप:।
आजानुबाहु: सुमुख: सिंहस्कन्धो महाभुज:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचंद्रजी युवा और श्याम वर्ण के थे। उनकी आँखें हल्की लाल थीं। वे हाथियों के सरदार के समान शक्तिशाली थे। उनकी विशाल भुजाएँ घुटनों तक फैली हुई थीं। उनका मुख सुंदर था और उनके कंधे सिंह के समान थे।
 
‘Sri Ramachandraji was young and dark in complexion. His eyes were slightly red in colour. He was as powerful as the leader of the elephants. His large arms extended up to his knees. His face was beautiful and his shoulders were like those of a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)