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स चतुर्दशवर्षाणि वने प्रोष्य महातपा:।
दशाश्वमेधान् जारूथ्यानाजहार निरर्गलान्॥ ५९॥
अनुवाद
चौदह वर्ष तक वन में रहकर राजपद प्राप्त करने के पश्चात महातपस्वी श्री राम ने दस ऐसे अश्वमेध यज्ञ किए जो प्रशंसनीय थे और जहाँ किसी साधक के लिए द्वार कभी बंद नहीं होता था॥ 59॥
'After living in the forest for fourteen years and attaining the kingship, the great ascetic Shri Ram performed ten such Ashwamedha Yagnas which were worthy of praise and where the door was never closed for any seeker.॥ 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥