श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.29.56 
नान्योऽन्येन विवादोऽभूत् स्त्रीणामपि कुतो नृणाम्।
धर्मनित्या: प्रजाश्चासन् रामे राज्यं प्रशासति॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
स्त्रियों में भी कोई विवाद नहीं था; फिर पुरुषों का क्या? श्रीराम के राज्य में तो सभी लोग सदैव धर्म परायण रहते थे।
 
‘There was no dispute among women also; then what about men? During the reign of Shri Ram, all the people were always devoted to Dharma.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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