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mahabharat 12.29.54: ‘राम के राज्य में कोई प्राणी कभी जल में नहीं डूबता था, अग्नि कभी किसी को अनुचित रूप से नहीं जलाती थी और किसी को रोग का भय नहीं रहता था।॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.54 
प्राणिनो नाप्सु मज्जन्ति नान्यथा पावकोऽदहत्।
रुजाभयं न तत्रासीद् रामे राज्यं प्रशासति॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
‘राम के राज्य में कोई प्राणी कभी जल में नहीं डूबता था, अग्नि कभी किसी को अनुचित रूप से नहीं जलाती थी और किसी को रोग का भय नहीं रहता था।॥ 54॥
 
‘During the reign of Rama's kingdom no creature ever drowned in water, fire never burned anyone inappropriately and no one had to fear disease.॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)