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mahabharat 12.29.52: ‘उनके राज्य में कोई भी स्त्री अनाथ या विधवा नहीं हुई। जब तक श्री रामचंद्रजी राज्य करते रहे, वे अपनी प्रजा पर पिता के समान दया करते रहे।’ 52.   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.52 
विधवा यस्य विषये नानाथा: काश्चनाभवन्।
सदैवासीत् पितृसमो रामो राज्यं यदन्वशात् ॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
‘उनके राज्य में कोई भी स्त्री अनाथ या विधवा नहीं हुई। जब तक श्री रामचंद्रजी राज्य करते रहे, वे अपनी प्रजा पर पिता के समान दया करते रहे।’ 52.
 
‘No woman in his kingdom became orphan or widow. As long as Shri Ramchandraji ruled the kingdom, he always remained kind to his subjects like a father. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)