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mahabharat 12.29.51: सृंजय! ऐसा सुना गया है कि दशरथपुत्र भगवान् श्री रामजी भी यहीं से परमधाम को प्रस्थान कर गए थे, जो अपनी प्रजा पर सदैव उसी प्रकार कृपा करते थे, जैसे पिता अपने पुत्रों पर करता है॥51॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.29.51 
रामं दाशरथिं चैव मृतं सृंजय शुश्रुम।
योऽन्वकम्पत वै नित्यं प्रजा: पुत्रानिवौरसान्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
सृंजय! ऐसा सुना गया है कि दशरथपुत्र भगवान् श्री रामजी भी यहीं से परमधाम को प्रस्थान कर गए थे, जो अपनी प्रजा पर सदैव उसी प्रकार कृपा करते थे, जैसे पिता अपने पुत्रों पर करता है॥51॥
 
'Srunjay! It has been heard that Lord Shri Ram, the son of Dasharatha, also departed from here for the Supreme Abode, who always showered his blessings on his subjects like a father showers his blessings on his own sons. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)