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mahabharat 12.29.5: धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा का उल्लंघन कभी नहीं कर सकते थे, क्योंकि श्रीकृष्ण उन्हें बचपन से ही अर्जुन से अधिक प्रिय थे ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.5 
अनतिक्रमणीयो हि धर्मराजस्य केशव:।
बाल्यात् प्रभृति गोविन्द: प्रीत्या चाभ्यधिकोऽर्जुनात् ॥ ५॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा का उल्लंघन कभी नहीं कर सकते थे, क्योंकि श्रीकृष्ण उन्हें बचपन से ही अर्जुन से अधिक प्रिय थे ॥5॥
 
Dharmaraja Yudhishthira could never disobey Lord Krishna's command because Krishna was dearer to him than Arjuna since his childhood. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)