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mahabharat 12.29.49: उन्होंने एक हज़ार से भी ज़्यादा घोड़े बाँधे, यज्ञ वेदियों का विस्तार किया और अश्वमेध यज्ञ किया। इसमें भरत ने आचार्य कण्व को सोने के एक हज़ार कमल भेंट किए।   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.49 
परं सहस्राद् यो बद्धान् हयान् वेदीर्वितत्य च।
सहस्रं यत्र पद्मानां कण्वाय भरतो ददौ॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने एक हज़ार से भी ज़्यादा घोड़े बाँधे, यज्ञ वेदियों का विस्तार किया और अश्वमेध यज्ञ किया। इसमें भरत ने आचार्य कण्व को सोने के एक हज़ार कमल भेंट किए।
 
‘They tied more than a thousand horses and expanded the sacrificial altars and performed the Ashwamedha sacrifice. In it Bharata presented a thousand lotuses made of gold to Acharya Kanva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)