Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.29.44: सृंजय! राजा शिबि उपर्युक्त चारों शुभ कर्मों में तुमसे कहीं अधिक श्रेष्ठ थे। वे तुम्हारे पुत्र से भी अधिक पुण्यात्मा थे। जब वे भी मर गए, तो अन्यों का क्या होगा? अतः तुम अपने पुत्र के लिए शोक मत करो। उसने न तो कोई यज्ञ किया था, न दक्षिणा दी थी; अतः उस पुत्र के लिए शोक नहीं करना चाहिए॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अदक्षिणमयज्वानं मा पुत्रमनुतप्यथा:।
स चेन्ममार सृंजय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथा:॥ ४४॥
अनुवाद
सृंजय! राजा शिबि उपर्युक्त चारों शुभ कर्मों में तुमसे कहीं अधिक श्रेष्ठ थे। वे तुम्हारे पुत्र से भी अधिक पुण्यात्मा थे। जब वे भी मर गए, तो अन्यों का क्या होगा? अतः तुम अपने पुत्र के लिए शोक मत करो। उसने न तो कोई यज्ञ किया था, न दक्षिणा दी थी; अतः उस पुत्र के लिए शोक नहीं करना चाहिए॥ 44॥
‘Srunjay! King Sibi was far superior to you in all the four auspicious things mentioned above. He was even more pious than your son. When he too died, what about the others, so do not grieve for your son. He had neither performed any yajna, nor given dakshina; so one should not grieve for that son.॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥