| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न » श्लोक 41-42h |
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| | | | श्लोक 12.29.41-42h  | यावदद्य गवाश्वं स्यादारण्यै: पशुभि: सह॥ ४१॥
तावती: प्रददौ गा: स शिबिरौशीनरोऽध्वरे। | | | | | | अनुवाद | | आज संसार में जितने गाय, बैल, घोड़े, जंगली पशु आदि हैं, उतनी ही गायें उशीनर के पुत्र शिबि ने अपने यज्ञ में दान की थीं। | | | | 'The number of cows, bulls and horses, including wild animals, that are present in the world today, is the same number of cows that Shibi, son of Ushinara, donated in his yajna. 41 1/2. | | ✨ ai-generated | | |
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