Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.29.38-39h: सृंजय! बृहद्रथ उपरोक्त चारों शुभ गुणों में आपसे कहीं श्रेष्ठ था और आपके पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा था। जब वह भी मर गया, तो अन्य लोगों का क्या होगा? अतः आप अपने पुत्र के लिए शोक न करें। 38 1/2। | mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चेन्ममार सृंजय चतुर्भद्रतरस्त्वया॥ ३८॥
पुत्रात् पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथा:।
अनुवाद
सृंजय! बृहद्रथ उपरोक्त चारों शुभ गुणों में आपसे कहीं श्रेष्ठ था और आपके पुत्र से भी अधिक धर्मात्मा था। जब वह भी मर गया, तो अन्य लोगों का क्या होगा? अतः आप अपने पुत्र के लिए शोक न करें। 38 1/2।
‘Srunjay! Brihadratha was far superior to you in all the four auspicious qualities mentioned above and was even more pious than your son. When he too died, what about others? Therefore, do not be sad for your son. 38 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥