श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  12.29.37-38h 
न जातो जनिता नान्य: पुमान् य: सम्प्रदास्यति॥ ३७॥
यदङ्ग: प्रददौ वित्तं सोमसंस्थासु सप्तसु।
 
 
अनुवाद
अंगराजने सात सोम-संस्थाओंको इतना धन दान किया था, उतना किसी मनुष्यने न कभी किया है, न कभी कर सकेगा ॥37 1/2॥
 
‘Angaraj had donated so much money to the seven Som-institutions*, no human being has ever done so or will ever be able to do so.॥ 37 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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