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mahabharat 12.29.35-36h: जब यजमान अंग विष्णुपद पर्वत पर यज्ञ कर रहे थे, तब सोमरस पीकर इन्द्र मतवाले हो गए और ब्राह्मण भी आहुति पाकर आनंद से भर गए। 35 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.29.35-36h 
अङ्गस्य यजमानस्य तदा विष्णुपदे गिरौ॥ ३५॥
अमाद्यदिन्द्र: सोमेन दक्षिणाभिर्द्विजातय:।
 
 
अनुवाद
जब यजमान अंग विष्णुपद पर्वत पर यज्ञ कर रहे थे, तब सोमरस पीकर इन्द्र मतवाले हो गए और ब्राह्मण भी आहुति पाकर आनंद से भर गए। 35 1/2
 
When the host Ang was performing a sacrifice on the Vishnupad mountain, Indra became inebriated after drinking the Soma juice and the Brahmins too were filled with joy after receiving the offerings. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)