श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 29: श्रीकृष्णके द्वारा नारद-सृंजय-संवादके रूपमें सोलह राजाओंका उपाख्यान संक्षेपमें सुनाकर युधिष्ठिरके शोकनिवारणका प्रयत्न  »  श्लोक 31-33h
 
 
श्लोक  12.29.31-33h 
अङ्गं बृहद्रथं चैव मृतं सृंजय शुश्रुम॥ ३१॥
य: सहस्रं सहस्राणां श्वेतानश्वानवासृजत्।
सहस्रं च सहस्राणां कन्या हेमपरिष्कृता:॥ ३२॥
ईजानो वितते यज्ञे दक्षिणामत्यकालयत्।
 
 
अनुवाद
सृंजय! हमने सुना है कि अंगदेश के राजा बृहद्रथ की भी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अपने विशाल यज्ञ में दस लाख श्वेत अश्व तथा स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित दस लाख कन्याएँ दक्षिणा में दान की थीं।'
 
‘Srunjay! We have heard that King Brihadrath of Angadesh also died. While performing the yajna, he had given away ten lakh white horses and ten lakh girls decked with gold ornaments as dakshina in his huge yajna. 31-32 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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